आज सुबह से ही टीवी के आगे डटा था. निगाहें समाचार चेनलों पर टिकी थी. हो भी क्यूँ ना पूरा देश इसे देख रहा था. कश्मीर के एक विशाल सभागार में पाकिस्तान की खुबसूरत और युवा विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की विशाल सभा को संबोधित करने वाली थी. इस सभा में भारतीय कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के साथ आतंकवादी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे. इस मंथन बैठक में किसी सरकारी प्रतिनिधि को शामिल होने की इज़ाज़त नहीं थी. माना जा रहा था की इस बैठक के बाद कश्मीर के जेहादियों की भावी रणनीति की दिशा दशा में बड़ा परिवर्तन होने वाला है. यही कारण है की केन्द्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों के जासूसों के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के जासूसों के कान भी सभागार की दीवारों से सटे थे. लेकिन हिना रब्बानी अपने खुबसूरत चेहरे पर नूर और मीठी मुस्कराहट लिए आत्मविश्वास से लबरेज़ थी.
ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा घोषित आतंकी संगठन का एक प्रतिनिधि सभागार अपने ओजस्वी भाषण के दौरान विश्व में हुई सशस्त्र क्रांतियों के बारे में विस्तार पूर्वक बता रहा था. इस दौरान वह क्रांतिकारियों के नामों के साथ साथ कश्मीरी जेहादियों का जिक्र करने से भी नहीं चुक रहा था. उसका लम्बा व सारगर्भित भाषण सशस्त्र क्रांति और उसकी आवश्यकताओं पर ही केन्द्रित रहा. सभागार में बैठे अधिकतर लोग आतंकी संगठन के इस नेता की बात से सहमत थे और प्रभावित भी. लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियों व देशभर को जिस बात की प्रतीक्षा थी उसका इस बात से कोई लेना देना नहीं था. सभी जानते हैं की कश्मीर के अलगाववादी नेता प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में आतंकी संगठनो की मदद करते ही रहते हैं. और फिर आज तो भारत सरकार ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र के आग्रह पर आत्ममंथन के लिए विशेष छुट दी हुई थी. ख़ुफ़िया एजेंसियों को इसमें भी एक बड़ी साजिश की आशंका सता रही थी.
आतंकी संगठन के नेता के भाषण के बाद अब जो वक्ता भाषण के लिए आ रहा था. वह शांतिदूत के भेस में आईएसआई का वरिष्ठ पदाधिकारी था. उसकी बातें आतंकी संगठनों के नेताओं के लिए कड़ा आदेश होंगी. उसके खड़े होते ही सभागार में सन्नाटा छा गया. अधेड़ वक्ता ने गला साफ कर बोलना शुरू किया. उसने अपने भाषण की शुरुवात कश्मीर के इतिहास से करते हुए कश्मीरी जेहादियों के जख्मों को खूब कुरेदा. जैसे जैसे सूचनाएं बहार आ रही थी राजनेताओं, पत्रकारों व बुद्धिजीवियों के खून का दौरा बढ़ता जा रहा था. और सरकार की देश भर में माहौल बिगड़ने की चिंता बढती जा रही थी. इसी बीच..................................... समाचार चैनल पर उबाऊ विज्ञापनों ने ध्यान भंग कर दिया. तुरंत चैनल बदल कर दुसरे समाचार चैनलों का रुख देखना चाहा तो सभी का हाल एक जैसा था. समाचार चैनलों की मिलीभगत पर पहली बार इतना गुस्सा आया. बड़ी बैचेनी के साथ 5 मिनट गुज़रे. तब तक आईएसआई अधिकारी का भाषण दिशा बदल चुका था. अब वह विश्व में सशस्त्र क्रांतियों से मानवता को होने वाले नुकसान के बारे में बता रहा था. साथ ही कह रहा था की सशस्त्र क्रांति ने मानवता के नुकसान के इलावा नफरत , घृणा के सिवा कुछ नहीं दिया. यहाँ तक की देर सवेर क्रांतिकारियों को भी इस गलती का एहसास हुआ. उसने ये बात कह कर सभा को सन्न कर दिया की सीमा पार से सहायता पहुँचाने वाली मानवता विरोधी ताकतों पर शिकंजा कसा जाएगा. शायद यह बात कहकर आईएसआई अधिकारी पाकिस्तान को पाक साफ साबित करने की नाकाम कोशिश कर रहा था. वक्ता की बात सुन कर आतंकी नेताओं व अलगाववादी नेताओं की आँखों में आक्रोश साफ नज़र आने लगा. आईएसआई अधिकारी की निगाहों से भी यह नाराज़गी छुपी नहीं रही. उसने स्थिति को भांपते ही तत्काल सुर नरम करते हुए कहा की पाकिस्तान उनका विरोधी नहीं है. बल्कि सच्चा हमदर्द है. और दुःख सुख की हर घडी में उनके साथ है. ये कहकर उपस्थित नेताओं का क्रोध शांत करते हुए अपनी बात समाप्त कर दी. इस सब के बीच हिना रब्बानी निर्विकार भाव से सब कुछ देख रही जैसे की उसे सभा का नतीजा पहले से ही मालूम हो.
सभा चलते हुए 8 घंटे बीत चुके थे. सस्पेंस बढता ही जा रहा था. की आखिरकार इस बैठक में कुछ नतीजा निकलेगा भी या नहीं. इधर मेरी श्री मति जी कई बार खाने को पूछ चुकी थी. यहाँ तक की कोई जवाब ना मिलने पर और चाय बार बार ठंडी हो जाने पर चीढ़ रही थी. दर्ज़न भर वक्ताओं के लम्बे भाषणों के बाद पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार को अध्यक्षीय भाषण के लिए आमंत्रित किया गया. हिना के मंच पर पहुँचने के पांच मिनट तक सभागार तालियों से गूंजता रहा. तालियों की गूंज ने हिना की लोकप्रियता व सभासदों की उमीदों को जाहिर कर दिया. हिना ने अपनी बात बड़े अदब के साथ शुरू की. भाषण के पहले चरण में उसने लगभग सभी वरिष्ठ प्रतिनिधियों को संबोधित करने की बाद कश्मीरियों और पाकिस्तानियों के रिश्तों की गहराई बता कर उनके दिलों में जगह बनाने की कोशिश की. माहोल को हल्का फुल्का बनाने के बाद उसने कहा की पाकिस्तान अब अन्य सभी बातों को पीछे छोड़ कर विकास की दिशा में आगे बड़ना चाहता है. ऐसे में सीमा पर से हिंसा की किसी गतिविधि को शह नहीं दी जा सकती. उसने कहा की कश्मीरियों को ये बात भी अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए की यह समय सशस्त्र आंदोलनों का नहीं बल्कि अहिंसक आंदोलनों का है. अब कश्मीर की आज़ादी के परवानों को अपने पैरों पर खड़ा होना होगा. और हिंसा का रास्ता छोड़ अहिंसा का रास्ता अपनाना होगा. ये बात सुनते ही सभा में एक बार फिर सन्नाटा छा गया. हिना रब्बानी ने महात्मा गाँधी, का उदाहरण देते हुए बात आगे बढाई. और कहा की महात्मा गाँधी, दक्षिण अफ्रीका के गाँधी नेल्सन मंडेला, म्यांमार की गांधीवादी नेता आन सु की के अहिंसक आन्दोलन ज्वलंत उदाहरण है. भारत में हाल ही में हुए अन्ना हजारे के आमरण अनशन को दुनिया ने टीवी चैनलों पर देखा. क्या यह कश्मीरी क्रांतिकारियों से छुपा है ? कश्मीरियों को अन्ना के दिखाए रास्ते पर चलना होगा. इतना सुनते ही एक बार फिर सभागार तालियों से गूंज उठा.
तालियों की गूंज के साथ ही घबराकर मेरी नींद खुल गयी. आँख खुलते ही देखा तो चारों और अँधेरा छाया हुआ था. मैं पसीने से तरबतर हो चुका था. घडी में समय देखा तो रात के ढाई बज चुके थे. सिरहाने के पास रखा एक गिलास पानी पिया और सिरहाना ऊँचा कर सिर टीका दिया.
फिर वही ख्याल आँखों में तैर रहे थे. यदि ऐसा हुआ तो सभी चैनलों व समाचार पत्रों में कश्मीरियों जेहादियों के आमरण अनशन, सत्याग्रह और असहयोग आंदोलनों से भरे होंगे. अंतर्राष्ट्रीय मिडिया उनका खूब समर्थन कर रहा होगा. ऐसे में देश के अल्पसंख्यकों का झुकाव जेहादियों के पक्ष में होने की संभावनाएं बढ़ जाएगी. लाखों अल्पसंख्यक विश्व भर से कश्मीरी जेहादियों के पक्ष में अहिंसक आन्दोलन चलाएँगे, देश में लाखों लोग अन्ना बनकर अनशन पर बैठ जाएँगे. देश एक भयानक गृह युद्ध की आग में झुलस जाएगा. और पाकिस्तान पहली बार भारत के खिलाफ इतनी बढ़ी साजिश में कामयाब हो जाएगा.
यह सोच कर देश राजनितिक नेत्रत्व पर विश्वास जताते हुए आँखें बंद कर ईश्वर से प्रार्थना करने लगा की "हे ईश्वर, इन्हें गांधीवादी और अन्नावादी रास्तों से दूर रखना. इन्हें कभी सद्बुद्धि प्रदान मत करना. उन्हें असुरी प्रवृति में कायम रखना ताकि वे खुद की लगाई हिंसा की आग में भस्म हो जाएँ". यह सोचते हुए ना जाने कब मेरी आँख लग गयी.
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