भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के जोरदार आन्दोलन को देखते हुए मेरा भी खून खोलने लगा है, आमतौर पर जब भी मुझे कोई कुछ समझाने की कोशिश करता है तो मैं तुरंत रक्षात्मक मुद्रा में प्रतिवाद करता हूँ, ऐसा नहीं है की मैं पहले से भ्रष्टाचार विरोधी नहीं हूँ, लेकिन इस बार बात जरा अलग है, भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का आन्दोलन मुझे भी मैदान में उतरने के लिए मजबूर कर रहा है, कारण टेलीविजन पर नारे लगाते लोग, देश भक्ति के गीतों पर नाचते युवा मुझे भी आंदोलित कर रहे है, डर इस बात का है की मेरा कद और हैसियत अन्ना के के मुकाबले बाल बराबर भी नहीं है, इसलिए मेरे पीछे चलने वालों में मेरी परछाई के इलावा कोई भी नहीं,
अन्ना महान हैं भ्रष्टाचारियों के लिए फांसी की सजा मांग कर खुद को गांधीवादी कह सकते हैं, मेरी इतनी हिम्मत कहाँ, सिविल सोसाइटी के सदस्यों को छोड़ कर देश भर के सभी जनप्रतिनिधियों भ्रष्ट कह सकतें हैं, मुझमे इतना नैतिक बल नहीं, ये तो बस अन्ना ही कर सकते हैं, मैं अपने काम से 8 दिन की छुटी भी नहीं ले सकता, यार बल बच्चेदार हूँ, अन्ना इस बारे में तनावरहित हैं, और सच कहूँ तो भूखा रहना मेरे बस की बात नहीं, एकाध दिन का रिस्क ले भी लिया जाए तो सरकार का क्या भरोसा, बाबा रामदेव की तरह न निगलते बनेगा न उगलते, अपमान सहना पड़ेगा सो अलग, इतना पंगा कोन ले, लेकिन देश से भ्रष्टाचार मिटाना है तो क़ुरबानी तो देनी ही पड़ेगी, जब अन्ना अपने साथियों को लेकर जंग में उतर ही गए हैं तो में हाथ पे हाथ धरा बैठा रहूँ ये भी तो ठीक नहीं, और जब लड़ना ही है तो पूरी ईमानदारी से, लेकिन भ्रष्टाचार कोई व्यक्ति तो है नहीं जो मुझसे डर कर सुधर जाएगा,
तो लडूं किसके खिलाफ, केंद्र सरकार ही ठीक रहेगी, सभी तो उसके खिलाफ लड़ रहे है, भाजपा भी, रामदेव भी, अन्ना भी, तो मैं क्यूँ नहीं, "अबे ओ ओकात में रह कर बात कर तू अन्ना, बाबा रामदेव और भाजपा की बराबरी करने का प्रयास कर रहा है", माफ़ कीजिये ये मैंने आपसे नहीं बल्कि मेरी अंतर आत्मा में मुझसे कहा, कहाँ महान बाबा रामदेव, महान अन्ना, और विपक्ष और कहाँ मै तुच्छ, आन्दोलन ही करना है तो किसी बराबरी वाले के खिलाफ कर, बस ये बात सोच कर थोडा होसला बढ़ा, यही ठीक रहेगा, बराबरी का भ्रष्टाचारी देख कर पंगा ले लिया जाए, कुछ दोस्त और करीबी रिश्तेदार तो हैं जिनके खिलाफ मोर्चा खोला जा सकता है लेकिन बुरे वक्त में काम आते है कही बुरा न मान जाएँ, न भई न, और कोन ऐसा भ्रष्टाचारी हो सकता है जिसके खिलाफ आन्दोलन भी चलाया जा सके और किसी को बुरा भी न लगे, पापा, भाई, पत्नी नहीं बात नहीं बनेगी,
अरे आप कहीं ये तो नहीं सोचने लगे की में जान बुझ कर बहाने बना रहा हूँ, विश्वास कीजिये मैं गंभीर हूँ, लेकिन कोई बराबरी का भ्रष्ट व्यक्ति भी चाहिए जिसके खिलाफ लड़ा जाए, अब जब भाई और पत्नी वाली बात ही ख़त्म हो गयी बचा सिर्फ मै, लेकिन मै और भ्रष्ट कतई नहीं विश्वास कीजिये मैंने कभी रिश्वत के नाम पर एक रुपया भी नहीं लिया, हाँ छोटे मोटे तोहफे अब रिश्वत तो कहे नहीं जाएँगे, जहाँ तक रिश्वत देने की बात है, वो हो सकता है, यार अब इतने में तो मुझे भ्रष्ट मत कहने लगना, आदमी की मजबूरी भी होती है, शुक्र है कम से कम इसके लिए तो मैंने खुद को माफ़ कर ही दिया, अब रही बात आयकर की बस यहीं थोड़ी गड़बड़ है, कोशिश यही रहती है आयकर शून्य भरा जाए, अगर कुछ भरने की नोबत आ ही गयी तो यार सीए किसलिय है, जब शुल्क पूरा देता हूँ, कर चोरी के तरीके जानना मेरा हक़ है, हाँ कुछ फर्जी वर्जी दस्तावेज चाहिए तो वो जिम्मेदारी मेरी ही है, घर-कर के तो नाम से ही मुझे नफरत है, नगर परिषद् के लिए मेरे पास सीधा बहाना है आप काम तो कुछ करते नहीं टैक्स लेने आ जाते है, पहले काम कीजिये फिर टैक्स देंगे, हाँ आर्थिक तंगी का बहाना में नहीं सुनूंगा, सेलटैक्स किस बात का काम करें हम टैक्स ले सरकार वो तो भला हो बिचारे अधिकारीयों का जो ले देकर बात सस्ते में निपटा देते है, और लाखों की बात कुछ हजारों में निपट जाती है, सेवा कर का तो मुझे आज तक कोई ओचित्य ही समझ में नहीं आया, दोस्ती के नाते आपको बता रहा हूँ बात अपने तक ही रखियेगा, आज तक नहीं जमा करवाया, घर पर एसी लगवाने की सोच रहा हूँ बिज़ली के बिल की टेंशन में हूँ अब तो आप समझ ही गए होंगे उसका तोड़ निकलना ज्यादा मुश्किल नहीं है, आखिर विज्ञानं ने इतनी तरक्की इसीलिए तो की है की इन्सान उसका लाभ उठा सके, अब देखिये पथकर, भवन निर्माण पर कर, यात्रा पर कर इन सब से मुझे सख्त परहेज़ है, अब अगर सभी टैक्स ईमानदारी से देने लगा तो नहीं नहीं ये में सोच भी कैसे सकता हूँ,
अगर ये सब भ्रष्टाचार है तो सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी तो में ही हूँ, अब तो ये पक्का हुआ पहला आन्दोलन किसी और के खिलाफ नहीं बल्कि मेरे ही खिलाफ होना चाहिए, आज अन्ना के आन्दोलन के बहाने इस बात का विश्वास हो गया की जब तक मै नहीं सुधरूंगा तब तक कोई आन्दोलन सफल नहीं होगा, न ही देश से भ्रष्टाचार ख़त्म होगा, न ही कोई जन लोकपाल भ्रष्टाचार मिटा सकेगा, मैंने खुद के खिलाफ आन्दोलन शुरू कर दिया है, लेकिन नैतिक बल हासिल करने के लिए मुझे भी अन्नाओं की जरुरत है, हे अन्ना पहले मेरे खिलाफ आन्दोलन करो, विश्वास करो में मै केंद्र की तरह बेईमान नहीं इसमे आपका विरोध करने की बजाए आपका साथ दूंगा !
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